
धीरे-धीरे देखने की एक छोटी कहानी
नन्हा घुमक्कड़ चलता रहा, चलता रहा। उसने सौ चीज़ें देखीं, पर किसी को भी थामा नहीं।
"अगर मैं रुका, तो कुछ छूट जाएगा," उसने सोचा। इसलिए वह पहाड़ियों के पास से जल्दी-जल्दी निकल गया।
एक शाम वह एक छोटे-से सफ़ेद फूल के पास बैठ गया। बस एक फूल।
उसने बहुत देर तक धीरे-धीरे देखा। पाँच कोमल पंखुड़ियाँ। ओस की एक नन्ही बूँद।
उस छोटी-सी बूँद के अंदर उसे पूरा आसमान मिला, उलटा लेटकर सोया हुआ।
"छोटी चीज़ों में बड़ी चीज़ें समाई होती हैं," वह फुसफुसाया। शायद वह थोड़ा धीरे चल सकता था।
अगली सुबह उसने एक चिड़िया की आवाज़ सुनी। वह तब तक रुका रहा जब तक उसका गीत खत्म नहीं हो गया।
एक पत्ते के नीचे एक चींटी अनाज का दाना उठाए जा रही थी। घुमक्कड़ उसके नन्हे कदम देखता रहा।
एक तितली पंखुड़ी पर आ बैठी। राही ने उसके रंग गिने। नारंगी, काला, और सफ़ेद का एक नन्हा सा धब्बा।
झरने के किनारे उसे एक चिकना पत्थर मिला। पानी ने उसे गोल और चमकदार बना दिया था।
वह बिल्कुल चुपचाप बैठ गया। झरने का अपना ही एक गीत था। टप। टप। श्श्श।
एक ड्रैगनफ़्लाई धारा के ऊपर ठहरी थी। उसके पंख नन्ही खिड़कियों जैसे थे, और राही ने उनमें से आसमान देखा।
तभी बारिश गिरने लगी। "अरे नहीं," वह बोला। "अब तो मेरी सैर बिगड़ गई।"
वह एक पेड़ के नीचे रुक गया। टप, टप, टप। बारिश पत्तों पर संगीत बजा रही थी।
बारिश थमी तो रास्ते से एक घोंघा गुज़रा। वह अपना घर अपनी पीठ पर लिए चल रहा था।
घुमक्कड़ ने घोंघे का इंतज़ार किया। इस बार उसे धीमे होने का बुरा नहीं लगा।
बारिश के बाद घास की दो पत्तियों के बीच मकड़ी का जाला टँगा था। हर धागे पर चाँदी की एक बूँद थी, जैसे किसी परी के लिए बना हार।
आगे घास में एक खरगोश छिपा बैठा था। वह चुप रहा। दो लंबे कान ऊपर उठे और उसका स्वागत किया।
उसने एक हल्की-सी साँस ली, फिर एक और। उसके कंधे ढीले पड़ गए। जल्दी करने की कोई ज़रूरत नहीं थी।
शाम ढली तो उसने एक बादल को तैरते देखा। पहले नाव। फिर भालू। फिर बस एक बादल।
जैसे ही आसमान बैंगनी हुआ, पहला तारा निकल आया। राही घास में लेटकर गिनने लगा। एक। बस एक। वही काफ़ी था।
घास में एक नन्ही रोशनी टिमटिमाई। फिर एक और। जुगनू उसके पैरों के आसपास नाचने लगे।
उस रात उसे चिड़िया, पत्थर और बारिश याद आई। वे छोटी-छोटी चीज़ें उसके साथ रह गई थीं।
अगली सुबह वह थोड़ा और धीरे चला। उसने सब कुछ नहीं देखा था। पर उसने सचमुच कुछ देखा था। और उसकी दुनिया बड़ी लगने लगी। समाप्त।